महिलाओं को पीरियड लीव देने वाली याचिका खारिज, एस.सी. ने की खास टिप्पणी
नेशनल डेस्कः सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को देशभर में महिला छात्रों और कामकाजी महिलाओं को पीरियड्स में पेड लीव देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि कानून बनाया तो महिलाओं को कोई काम नहीं देगा, उनका करियर खत्म हो जाएगा। ये याचिकाएं डर पैदा करने के लिए, महिलाओं को हीन दिखाने के लिए, यह जताने के लिए दायर की जाती हैं कि पीरियड्स उनके साथ होने वाली कोई बुरी चीज है।
यह उनका पॉजिटिव राइट है, लेकिन उस नियोक्ता के बारे में सोचिए, जिसे पेड लीव देनी होगी। मान लीजिए आप पूरे प्राइवेट सेक्टर को महीने में एक बार छुट्टी लेने का अधिकार देते हैं तो यह उनके विकास के लिए नुकसानदायक हो सकता है। आपको वर्क प्लेस पर बनने वाली ये याचिकाएं डर पैदा करने के लिए, महिलाओं को हीन दिखाने के लिए, यह जताने के लिए दायर की जाती हैं कि पीरियड्स उनके साथ होने वाली कोई बुरी चीज है।
यह उनका पॉजिटिव राइट है, लेकिन उस नियोक्ता के बारे में सोचिए, जिसे पेड लीव देनी होगी। मान लीजिए आप पूरे प्राइवेट सेक्टर को महीने में एक बार छुट्टी लेने का अधिकार देते हैं तो यह उनके विकास के लिए नुकसानदायक हो सकता है। आपको वर्क प्लेस पर बनने वाली मानसिकता का अंदाजा नहीं है। इस पर कानून बना तो महिलाओं के करियर को होने वाले नुकसान का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाएगा। कोई भी उन्हें जिम्मेदारियां नहीं देगा, यहां तक कि ज्यूडीशियल सर्विस में भी, उन्हें सामान्य मुकदमे नहीं सौंपे जाएंगे।

मीडिया दस्तक के चीफ एडिटर अशोक श्रीवास्तव पत्रकारिता के क्षेत्र में 1992 से सक्रिय हैं। भारतीय बस्ती, स्वतंत्र चेतना, जनकदम, 7 डेज नागरिक, पंजाब केसरी, वॉयस आफ मूंवमेन्ट, स्पष्ट आवाज जैसे अखबारों में योगदान देते हुये 10 सालों से खुद के मीडिया संस्थान ‘मीडिया दस्तक न्यूज’ का संचालन कर रहे हैं। वे बस्ती चेतना साप्ताहिक अखबार के संपादक भी हैं। अशोक श्रीवास्तव अपनी बेबाक शैली, निष्पक्षता और साफ सुथरी, इमानदार पत्रकारिता के लिये जाने जाते हैं।




